लेखपाल परीक्षा में पकड़ा गया कान से ब्लुटूथ डिवाइस निकालता हुआ करन

लेखपाल परीक्षा में पकड़ा गया कान से ब्लुटूथ डिवाइस निकालता हुआ करन

लेखपाल परीक्षा में कानपुर नवाबगंज के डीपीएस नगर निगम इंटर कॉलेज में ब्लुटूथ डिवाइस से नकल करते पकड़ा गया अभ्यर्थी करन कुमार. करन प्रयागराज मऊआइमा का रहने वाला है और सॉल्वर गैंग से सीधे जुड़ा हुआ है.

यूपी लेखपाल परीक्षा में ब्लुटूथ डिवाइस से सेंधमारी की प्रयास करने वाले गैंग के 21 अभ्यर्थियों को एसटीएफ ने पकड़ लिया है. प्रयागराज के नकल माफिया नरेंद्र कुमार पटेल और संदीप पटेल को अरैस्ट किया है. दोनों से पूछताछ के आधार पर उत्तर प्रदेश के कई जिलों से 21 अभ्यर्थियों को नकल करते एसटीएफ ने पकड़ा है. पकड़े गए सभी अभ्यर्थियों के पास से ब्लुटूथ डिवाइस बरामद हुई है. एसटीएफ कानपुर ने नवाबगंज से पकड़े गए अभ्यर्थी करन कुमार से बात की तो नकल की पूरी स्क्रिप्ट समझ में आई जो जस का तस आपके सामने है.

लेखपाल परीक्षा में पकड़ा गया करन कान से ब्लुटूथ डिवाइस निकालता हुआ.

कान में लगी थी ब्लुटूथ डिवाइस, बनियान में था माइक

कानपुर एसटीएफ ने नवाबगंज के परीक्षा केंद्र डीपीएस नगर निगम इंटर कॉलेज से अभ्यर्थी करन कुमार को ब्लुटूथ डिवाइस से नकल करते पकड़ा. अभ्यर्थी मऊ आइम प्रयागराज का रहने वाला है. यह अभ्यर्थी नगर माफियाओं के गढ़ का रहने वाला है और नगर माफियाओं के सीधा संपर्क में था. पूछताछ में सामने आया कि नकल माफियाओं ने एक ऐसी ब्लुटूथ डिवाइस का नकल में उपयोग किया था. जो कान के अंदर चली जाती थी. डिवाइस का माइक एक एटीएम कार्ड नुमा चिप में अभ्यर्थी के गर्दन के नीचे बनियान में छिपी हुई थी.

परीक्षा प्रारम्भ होते ही सॉल्वर गैंग एक-एक अभ्यर्थी को भिन्न-भिन्न केंद्र के बाहर या अन्य स्थान बैठकर पेपर सॉल्व करा रहा था. इसी बीच नकल माफिया एसटीएफ के हत्थे चढ़ने पर उसकी पूरी लिस्ट एसटीएफ के पास आ गई और प्रदेश भर में ताबड़तोड़ छापेमारी करके एक के बाद एक 21 अभ्यर्थियों को डिवाइस से नकल करते अरैस्ट कर लिया.सरलता से हो जाती है फिट.

इतनी छोटी ब्लुटूथ डिवाइस की कान में सरलता से हो जाती है फिट.

अभ्यर्थी ने बनियान में सीने के पास छिपा रखा था डिवाइस का माइक.

जाति के हिसाब से लिया था नकल का ठेका

एसटीएफ की पूछताछ में चौंकाने वाली बात सामने आई है. सॉल्वर गैंग ने जाति के हिसाब से पास कराने का ठेका लिया था. जनरल कैंडिडेट से 12 लाख, ओबीसी से 10 लाख और एससी कैंडीडेट से 8 लाख रुपए में परीक्षा पास कराने का ठेका लिया था. प्रति कैंडिडेट एक सॉल्वर सेट किया गया था. परीक्षा प्रारम्भ होते ही अभ्यर्थी का सॉल्वर उसे केंद्र के आसपास या अन्य स्थान बैठकर उससे कनेक्ट हो गया और अभ्यर्थी उधर से बनियान में सीने में लगी चिप से एक-एक प्रश्न करके पूछता जा रहा था और सॉल्वर पूरा पेपर सॉल्व करा रहा था.